नई तकनीक के साथ PETA इंडिया देश के हाथियों का भविष्य बदल रहा है। NDTV के द चेंजमेकर्स सीज़न 5 में दिखाया गया है कि कैसे PETA इंडिया करुणा और तकनीक को साथ लाकर परंपराओं को बदल रहा है, हाथियों के प्रति सहानुभूति को बढ़ावा दे रहा है और उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने में मदद कर रहा है।
(Wildlife SOS का विशेष धन्यवाद उन्होंने हथिनी लक्ष्मी, जिसे PETA इंडिया द्वारा बचाया गया था, और अन्य बचाए गए हाथियों के प्रति उनके प्यार और देखभाल के लिए, और इस डॉक्यूमेंट्री में उनके अभयारण्य को शामिल करने के लिए। Wildlife SOS एक अलग संस्था है और उसका PETA इंडिया से कोई संबंध नहीं है और न ही दोनों के बीच कोई फंडिंग संबंध नहीं है।)

हाथी जंगलों में रहने के लिए हैं, ज़ंजीरों में कैद करने के लिए नहीं ।

हाथी बुद्धिमान, सामाजिक और भावनात्मक वन्य पशु होते हैं। फिर भी बंदी बनाकर रखे जाने पर वे अकल्पनीय पीड़ा सहते हैं, उनके साथ मार-पीट कर, हथियारों का इस्तेमाल कर,  उन्हें लगभग निरंतर जंजीरों से बांधकर, पर्याप्त भोजन, पानी तथा पशु-चिकित्सा देखभाल के अभाव में रखा जाता है।

सवारी, सर्कस या धार्मिक जलूसों जैसे आयोजनों में उपयोग किए जाने वाले हाथी अकेलेपन से जूझते हैं और लंबे समय तक ज़ंजीरों में बंधे रहने तथा कंक्रीट पर खड़े रहने के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्याएँ और घाव हो जाते हैं। निराश और तनावग्रस्त होकर उनमें से कई बेकाबू हो जाते हैं, जिससे इंसानों को चोटें लगती हैं और कई बार मौत भी हो जाती है। केवल केरल में ही, हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स के अनुसार, बंदी हाथियों ने 15 वर्षों में 526 लोगों की जान ली।

उनकी पीड़ा को लेकर चिंतित PETA इंडिया ने एक ऐसा समाधान खोजने की कोशिश की जिससे हमारी परंपराएँ और मनोरंजन जारी रह सकें, लेकिन हाथियों को कोई हानि न हो। इसी तरह असली हाथियों के स्थान पर मैकेनिकल हाथियों का उपयोग करने की अवधारणा की शुरुआत हुई। इसी बीच, Wildlife SOS जैसे अभयारण्यों में बचाए गए हाथियों,  जिनमें PETA इंडिया और अन्य द्वारा बचाए गए हाथी भी शामिल हैं, को शक्ति, बेहतर स्वास्थ्य, स्वायत्तता और आत्मविश्वास पाने में मदद मिल रही है। (डॉक्यूमेंट्री में दिखाई गई सैंक्चुरी Wildlife SOS द्वारा संचालित है।)

 

पशु-अनुकूल परंपराओं के लिए क्रांतिकारी तकनीक

असली जैसा दिखने वाले मैकेनिकल हाथी 3 मीटर ऊँचे और 800 किलोग्राम वज़नी होते हैं। इन्हें रबर, फ़ाइबर, धातु, जाली, फ़ोम और स्टील से बनाया जाता है और ये पाँच मोटरों पर चलते हैं। एक मैकेनिकल हाथी अपना सिर हिला सकता है, कान और आँखें हिला सकता है, अपनी पूँछ झटका सकता है, सूंड उठा सकता है, और यहाँ तक कि पानी भी छिड़क सकता है। पहियों वाले बेस पर लगे होने के कारण इन पर चढ़ा भी जा सकता है, और पीछे एक सीट लगाई जा सकती है, जिससे इन्हें जुलूसों और सवारी के लिए आसानी से चलाया और धकेला जा सकता है।

हाल ही में सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने PETA इंडिया के साथ मिलकर एशिया के दूसरे सबसे बड़े ISKCON मंदिर —ISKCON Navi Mumbai, को गजेन्द्र नाम का एक मैकेनिकल हाथी भेंट किया।

PETA इंडिया ने 2023 की शुरुआत में धार्मिक संस्थानों द्वारा असली हाथियों के उपयोग को मैकेनिकल हाथियों से बदलने के लिए सहानुभूतिपूर्ण आंदोलन की शुरुआत की। अब भारत के मंदिरों में कम से कम बीस मैकेनिकल हाथियों का उपयोग किया जा रहा है। PETA इंडिया ने सोलह हाथियों का दान किया है, जिनमें कुछ NGO Compassion Unlimited Plus Action (CUPA) के साथ हैं, ताकि उन मंदिरों के निर्णय को मान्यता दी जा सके जो कभी असली हाथी रखने या किराए पर लेने का विकल्प नहीं अपनाते। PETA इंडिया ने मुहर्रम जुलूस में असली हाथी के स्थान पर मैकेनिकल हाथी इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भी रखा है, लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।

 

 

एशिया की पहली एनिमैट्रॉनिक हथिनी के जरिए स्कूलों में बच्चों को मानवीय शिक्षा

PETA इंडिया की एक और अनूठी पहल में बच्चों को हाथियों के प्रति दया और सहानुभूति सिखाने के लिए “एली” का उपयोग किया गया है, जो एशिया का पहला एनिमैट्रॉनिक हथिनी है और जिसे अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा ने आवाज़ दी है। अब तक ‘एली’ 280 स्कूलों में जाकर बच्चों को हाथियों को अपनी और अपने जैसे अनेकों हाथियों की दर्दनाक कहानी सुना चुकी है कि सर्कस और अन्य आयोजनों के लिए कैसे हाथियों को उनके परिवारों से छीनकर लाया जाता है और फिर यातनाएं देकर उन्हें सर्कस में असामान्य करतब करने के लिए मजबूर किया जाता है।

 

 

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