माँस के लिए ‘कुत्ते को भूनकर’ प्रजातिवाद खत्म करने की अपील
For Immediate Release:
10 September 2026
Contact:
Apeksha Tamane; [email protected]
Sanskriti Bansore; [email protected]
पुणे – शुक्रवार को पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) का एक समर्थक पुणे में एक ग्रिल पर एक “कुत्ते” को आग पर भूनेगा। यह चौंकाने वाला दृश्य यह संदेश देगा कि सभी पशु मांस, खून और हड्डियों से बने हैं; हम सभी में दर्द और भावनाओं को महसूस करने की समान क्षमता है; और मांस खाने का मतलब ऐसे संवेदनशील जीवों के शव खाना है, जो अपने जीवन को उतना ही महत्व देते थे जैसे कि कुत्ते देते हैं और मरना नहीं चाहते थे।
कब: शुक्रवार, 11 सितंबर 2026, दोपहर 12 बजे
कहां: महाराष्ट्र, पुणे, डेक्कन जिमखाना, फर्ग्यूसन कॉलेज रोड, वेस्टसाईड स्टोर के सामने, 411004
PETA इंडिया की कैंपेन कोऑर्डिनेटर अपेक्षा तामने कहती हैं- “जब दर्द और पीड़ा महसूस करने की क्षमता की बात आती है, तो मुर्गियां, बकरियां और गायें कुत्तों से अलग नहीं हैं। PETA इंडिया उन सभी लोगों से अपील कर रहा है, जिन्हें कुत्ते का माँस खाने का विचार बुरा लगता है, कि वे बाकी सभी पशुओं को भी अपने भोजन की थाली का हिस्सा न बनाएं”
PETA इंडिया इस सिद्धांत में विश्वास रखता है कि “पशु हमारे खाने के लिए नहीं हैं।” PETA इंडिया ने “Glass Walls” नामक डॉक्यूमेंट्री में दिखाया है कि भैंसों, बकरियों और भोजन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य पशुओं को अक्सर इतनी बड़ी संख्या में वाहनों में ठूंस दिया जाता है कि कई पशु रास्ते में गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। उन्हें पीटा जाता है, घसीटा जाता है और आमतौर पर भोजन, पानी और पशु चिकित्सा देखभाल जैसी बुनियादी जरूरतों से भी वंचित रखा जाता है। बूचड़खाने में उन्हें एक-दूसरे के सामने ही मार दिया जाता है और अक्सर उनके होश में रहते हुए ही उनके शरीर के अंग काटे जाते हैं और खाल उतारी जाती है, जिससे वे दर्द महसूस करते रहते हैं।
पशु-आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन हृदय रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज़, कैंसर और मोटापे से पीड़ित होने के बढ़ते जोखिम से स्पष्ट रूप से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, भोजन के लिए पशुओं को पालना दुनियाभर में जल प्रदूषण और भूमि के क्षरण के प्रमुख कारणों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि जलवायु संकट के सबसे गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए दुनियाभर में वीगन भोजन की ओर बढ़ना जरूरी है।
PETA इंडिया प्रजातिवाद का विरोध करता है, जो इंसानों को अन्य प्रजातियों से श्रेष्ठ मानने वाली सोच है। अधिक जानकारी के लिए PETAIndia.com पर जाएं या X , Facebook या Instagram पर समूह को फॉलो करें।
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