विशाल ‘बिल्ली’ और ‘कुत्ता’ विश्व स्पे डे पर पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control) का महत्व समझाएंगे

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20 February 2025

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Atharva Deshmukh; [email protected] 

Hiraj Laljani; [email protected]  

रायपुर – विश्व स्पे डे (25 फरवरी) से पहले, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया और वीगन ऑफ छत्तीसगढ़ के समर्थक बिल्ली और कुत्ते के रूप में कपड़े पहनकर रायपुर में एक कक्षा आयोजित करेंगे, जहां वे लोगों को ब्लैक बोर्ड पर पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control) के महत्व के बारे में बताएंगे। इस कक्षा में पप प्रोफेसर और किटी ट्यूटर यह समझाएंगे कि साथी पशुओं की नसबंदी से उनके जीवन में लंबे समय तक स्वास्थ्य लाभ होते हैं, और यह बेघर पशुओं की बढ़ती समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।

समय:              शुक्रवार, 21 फरवरी, ठीक दोपहर 12 बजे

स्थान:              मरीन ड्राइव (तेलीबांधा झील), सिविल लाइंस, रायपुर, छत्तीसगढ़ 492001

PETA इंडिया के कैम्पेन कोऑर्डिनेटर अथर्व देशमुख ने कहा, “हर साल लाखों कुत्ते और बिल्लियाँ सड़कों पर दुख और दर्द सहती हैं या शेल्टरों में बिना प्यार और देखभाल के अकेली पड़ी रहती हैं, सिर्फ इस वजह से कि उनको अपनाने वाले घर नहीं होते। PETA इंडिया सभी से आग्रह करता है कि वे इन अनगिनत पशुओं के जन्म को रोकने में मदद करें, ताकि वे पहले से ही बेघर पशुओं की बढ़ती समस्या का सामना कर रही इस दुनिया में न आएं। इसलिए, अपने साथी पशुओं की नसबंदी कराएं, सामुदायिक नसबंदी प्रयासों का समर्थन करें, और अपने साथी पशु को हमेशा शेल्टर से ही गोद लें।”

भारत में लाखों बेघर कुत्ते और बिल्लियाँ सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। हर साल 6 करोड़ से ज्यादा पशु भूख, प्यास, गाड़ियों की टक्कर और जानबूझकर किए गए अत्याचारों का शिकार होते हैं। इसके अलावा, 8 करोड़ 80 लाख पशु शेल्टरों में हैं, क्योंकि उनके लिए अच्छे घर उपलब्ध नहीं हैं। यह स्थिति अत्यंत दुखद है, लेकिन इसका समाधान उतना ही सरल है: पशु जन्म नियंत्रण यानि Animal Birth Control. नसबंदी किए गए पशु न केवल प्रजनन प्रणाली के कैंसर से बच सकते हैं, बल्कि नसबंदी किए गए कुत्ते और बिल्लियाँ आपस में कम लड़ाई करती हैं और इधर-उधर कम घूमती हैं। यह एक छोटा कदम है, लेकिन इसका असर बड़े पैमाने पर हो सकता है।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के अनुसार, नगर पालिका, नगर निगम और पंचायत जैसे संबंधित स्थानीय निकायों को सामुदायिक कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया गया है। PETA इंडिया कुत्तों और बिल्लियों के अभिभावकों से अपील करता है कि वे अपने साथी पशुओं की नसबंदी करवाएं, ताकि पहले से पैदा हुए अनगिनत बच्चों को एक प्यार भरा घर मिल सके, और वे भी एक खुशहाल, शांतिपूर्ण जीवन जी सकें। इस छोटे से कदम से हम न केवल उनके जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि बेघर पशुओं की बढ़ती संख्या पर भी काबू पा सकते हैं।

PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमे मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अन्य समस्त प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और हमें XFacebook, व Instagram सोशल मीडिया पर फॉलो करें।

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