सुनील शेट्टी, PETA इंडिया और CUPA ने कर्नाटक के श्री उमामहेश्वर वीरभद्रेश्वर मंदिर को “उमामहेश्वर” नामक एक विशालकाय यांत्रिक हाथी उपहार में दिया

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23 February 2025

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दावणगेरे – प्रसिद्ध अभिनेता सुनील शेट्टी, गैर-सरकारी संगठन पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया और कम्पैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन (CUPA) ने तवरेकेरे के शिलामाथा में कर्नाटक के श्री उमामहेश्वर वीरभद्रेश्वर मंदिर को “उमामहेश्वर” नामक एक विशालकाय यांत्रिक हाथी उपहार में दिया है, जो मंदिर के इस फैसले का सम्मान स्वरूप है कि वह कभी भी मंदिर में जीवित हाथियों को नहीं रखेंगे और ना ही किराए पर लेंगे। मंदिर को हाथी दान करने की यह योजना थैकर्सी समूह द्वारा प्रायोजित है। आज, उमामहेश्वर के मंदिर में एक उद्घाटन समारोह के माध्यम से “उमामहेश्वर” का  स्वागत किया गया और मंगला वाद्यम का प्रदर्शन किया गया। श्री उमामहेश्वर वीरभद्रेश्वर मंदिर दावणगेरे जिले का पहला मंदिर है जिसमें यांत्रिक हाथी आया है। उमामहेश्वर का इस्तेमाल मंदिर के धार्मिक आयोजनों हेतु किया जाएगा जिससे सभी कार्यक्रम अब पूर्णतया सुरक्षित और क्रूरता-मुक्त होंगे और असली हाथियों को जंगल में अपने परिवारों के साथ रहने में भी मदद मिलेगी।

 “उमामहेश्वर” का अनावरण दावणगेरे निर्वाचन क्षेत्र के विधान सभा के माननीय सदस्य श्री बसवराजू वी शिवगंगा द्वारा किया गया। इस अवसर पर चन्नागिरी रेंज के रेंज वन अधिकारी श्री डॉ. धनंजय सरजी, विधान सभा की पूर्व सदस्य श्रीमती श्वेता विश्वनाथ, श्री के. मदल विरुपाक्षप्पन, और शिलामठ, तवरेकेरे श्री रेणुका शिवाचार्य स्वामीजी भी उद्घाटन और समारोह में शामिल हुए। उद्घाटन में आध्यात्मिक नेता श्री रचोतेश्वर शिवाचार्य स्वामीजी और डॉ. अभिनव सिदालिंगा शिवाचार्य स्वामीजी भी उपस्थित थे।

उद्घाटन समारोह की तस्वीरें और वीडियो मांगे जाने पर उपलब्ध कराई जाएंगी। 

सुनील शेट्टी कहते हैं, “जंगली हाथी बीज फैलाने वाले होते हैं और पेड़ों पर अपने प्रभाव के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। हाथियों के कल्याण और पृथ्वी की खातिर, मैं यांत्रिक हाथी रखने की इस शानदार पहल में PETA इंडिया और CUPA के साथ मिलकर काम करके रोमांचित महसूस कर रहा हूँ। असली हाथियों की जगह यांत्रिक हाथी इस्तेमाल की यह पहल हमें भगवान द्वारा बनाए गए प्राणियों की रक्षा करते हुए पारंपरिक अनुष्ठानों और समारोहों में शामिल होने की अनुमति देती है”

“उमामहेश्वर बिल्कुल असली हाथी की तरह दिखते हैं, हम श्री उमामहेश्वर वीरभद्रेश्वर मंदिर की सराहना करते हैं और अन्य मंदिरों को भी बंदी हाथियों के खिलाफ क्रूरता समाप्त करने के लिए यांत्रिक हाथी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं” – दावणगेरे विधानसभा के सदस्य, श्री बसवराजू वी शिवगंगा

 श्री उमामहेश्वर वीरभद्रेश्वर मंदिर को उपहार स्वरूप दिया गया उमामहेश्वर एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह क्रूरता मुक्त है। यह अच्छा होगा यदि हम वन्यजीवों की रक्षा के लिए पूरे देश में असली हाथियों की जगह यांत्रिक हाथियों को बढ़ावा दें।” – पूर्व विधान सभा सदस्य, श्री के. मदल विरुपाक्षप्पा

शिलामठ के प्रमुख स्वामीजी, श्री रेणुका शिवाचार्य कहते हैं, “हम यांत्रिक हाथी, “उमामहेश्वर” का स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं, जो यह सुनिश्चित करेगा कि हमारे सभी अनुष्ठान सबसे सुरक्षित और पशु-अनुकूल तरीके से किए जाएं। हम अन्य मंदिरों से से भी आग्रह करते हैं कि वह भी अपने यहाँ असली हाथी रखने की बजाय एक यांत्रिक हाथी रखें“।

थैकर्सी फाउंडेशन की जलज कालरा कहती हैं, “हमारा मानना ​​है कि इस तरह की पहल धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से भारत में पशुओं के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाएगी।”

हाथी बेहद चतुर, सक्रिय और मिलनसार जंगली पशु हैं। हाथियों को धार्मिक आयोजनों और जुलूसों में इस्तेमाल करने के लिए अनेकों यातनाएं देकर प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वह इंसानों की आज्ञा मान सकें। मंदिरों और अन्य स्थानों पर बंदी बनाकर रखे गए कई हाथियों को घंटों तक कंक्रीट से जंजीरों में बंधे रहने के कारण पैरों की बेहद दर्दनाक समस्याओं और पैरों के घावों से पीड़ित होना पड़ता है। अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु चिकित्सा देखभाल और प्राकृतिक जीवन की किसी भी झलक से वंचित रखा जाता है। इन नारकीय परिस्थितियों में, कई हाथी अत्यधिक निराश हो जाते हैं और हमला कर देते हैं, जिससे अक्सर महावत या अन्य इंसानों की मौत हो जाती है।

हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, बंधक हाथियों ने 15 साल की अवधि में केरल में 526 लोगों की जान ले ली। थेचिक्कोट्टुकावु रामचंद्रन, जो लगभग 40 वर्षों से कैद में है और केरल के त्योहार सर्किट में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों में से एक है, ने कथित तौर पर 13 व्यक्तियों – छह महावत, चार महिलाओं और तीन हाथियों को मार डाला है।

PETA इंडिया ने 2023 की शुरुआत में मंदिरों में जीवित हाथियों की जगह यांत्रिक हाथी रखने की यह शानदार पहल शुरू की थी। अब, दक्षिण भारत के मंदिरों में कम से कम तेरह जगह यांत्रिक हाथियों का इस्तेमाल होता है, जिनमें से आठ हाथी PETA इंडिया दान में दिए गए हैं। यांत्रिक हाथी 3 मीटर लंबे और 800 किलोग्राम वजनी होते हैं। वे रबर, फाइबर, धातु, जाल, फोम और स्टील से बने होते हैं और पांच मोटरों पर चलते हैं। एक यांत्रिक हाथी वास्तविक हाथी की तरह दिखता है, महसूस करता है। यह अपना सिर हिला सकता है, अपने कान और आंखें हिला सकता है, अपनी पूंछ घुमा सकता है, अपनी सूंड उठा सकता है और यहां तक ​​कि पानी भी छिड़क सकता है। इन हाथियों की पीठ पर चढ़ा जा सकता है और पीछे एक सीट लगाई जा सकती है। इन्हें केवल प्लग लगाकर और बिजली से संचालित किया जा सकता है। उन्हें सड़कों के माध्यम से ले जाया जा सकता है और पहियों के माध्यम से उन्हें अनुष्ठानों और जुलूसों के लिए इधर-उधर ले जाया और धकेला जा सकता है।

कर्नाटक के दावणगेरे में शिलामाथा, तवरेकेरे में श्री उमामहेश्वर वीरभद्रेश्वर मंदिर, 1200 साल पुराना प्राचीन मंदिर और एक प्रतिष्ठित तीर्थस्थल है। श्री रेणुका शिवाचार्य स्वामीजी इस शिलामठ के प्रमुख हैं। यह मंदिर वार्षिक ग्रामदा जात्रा महोत्सव, श्रवण मास पूजा और कार्तिक मास दीपोत्सव के लिए प्रसिद्ध है; हर साल हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।

PETA इंडिया जो इस सिद्धांत में विश्वास रखता है कि “पशु हमारे मनोरंजन के लिए इस्तेमाल होने और हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं हैं” प्रजातिवाद का विरोध करता है। प्रजातिवाद एक ऐसी धारणा है जिसके तहत इंसान स्वयं को इस संसार में सर्वोपरि मानकर, अपनी जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का इस्तेमाल एवं शोषण करता है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट PETAIndia.com पर जाएँ और हमें XFacebook, Facebook हिन्दी, तथा Instagram पर फॉलो करें।

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